*आवारा कलम से* दिनेश अग्रवाल वरिष्ठ पत्रकार
शहडोल l
*सब-कुछ" लॉक-डाउन नहीं हुआ* !!
*सूरज* की किरणें कहां लॉक-डाउन है !!
*मां* का प्यार कहां लॉक-डाउन है !!
*परिवार* का साथ कहां लॉक-डाउन है !!
*सीखने* की कला कहां लॉक-डाउन है !!
*पशु-पक्षी* का प्यार कहां लॉक-डाउन है। !!
*उम्मीद* की किरण कहां लॉक-डाउन है !!
*मानवता* कहां लॉक-डाउन है !!
*बच्चो* का प्यार कहां लॉक-डाउन है !!
*फूलो* की सुगंध कहां लॉक-डाउन है !!
*रसोई* मां की कहां लॉक-डाउन है !!
*हंसना* सब का "मुस्कुराना" कहां लॉक-डाउन है !!
*भगवान* की प्रार्थना कहां लॉक-डाउन है !!
*अच्छे* और सात्विक विचार कहां लॉक डाउन हैं !!
वो तो जरा हम *वक्त* के पहिए से *घूमे* जा रहे थे !!
तो जरा *थम* कर सोचने का *मौका* मिला है !!
ए *इंसान* कमाने की "होड़" में लगा है !
जरा कुछ *पल* सांस ले-ले !
कुछ *अपनों* को तो कुछ *अपने* लिए भी जीले !!!
कोई "परेशानी" अपने साथ बहुत कुछ "अच्छा" भी लाती है !
और "बहुत" कुछ "सिखा"कर भी "जाती" है !
तो जरा "पल-भर" ठहरो आत्म-चिंतन करो !!
और "आने-वाले" सुखद समय की "प्रतीक्षा" और "स्वागत" करो !!
*आप सभी सुरक्षित है यही ईश्वर से मंगलकामना हैं*
🙏🙏🙏🙏




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