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कैसे आई ये महामारी :

 डॉ प्रियंका त्रिपाठी लेखिका से जानिए कोरोनावायरस महामारी से पूरे विश्व में किस तरह से सब कुछ चौपट हो गया है

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चीन से उपजी "कोरोना वायरस" नाम की यह महामारी आज संपूर्ण विश्व में अपना कहर फैला चुकी है, सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक सभी तरह की व्यवस्थाएँ लगभग हर देश में चौपट हो चुकी हैं, इस महामारी के चलते अर्थव्यवस्था तो डाँवाडोल हुई ही है, साथ ही शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने से बच्चों के भविष्य पर भी ग्रहण लग गया है ।


आज सबसे प्राथमिक आवश्यकता यह है कि हम अपने आप को इस महामारी से बचाएँ, मुझे याद है कि जब फरवरी/मार्च 2020 में इस वायरस का नाम पहली बार मैंने सुना तो इसके संक्रमण के चैन को सुनकर वाकई में अंदर तक दिल दहल गया मन में एक अजीब सा डर समा गया, उसके बाद मार्च से इसने भारत में प्रवेश किया और दिल्ली में दो-तीन केस निकले हर व्यक्ति के चेहरे पर  ख़ौफ़ ही नज़र आ रहा था और देखते-देखते पूरा भारत वर्ष लॉकडाउन की चपेट में आ गया, ज़िन्दगी रुक गई हर शख्स घर में कैद हो गया ।


13 अप्रैल 2020 की वो सुबह आज भी मुझे नहीं भूलती उसी दिन मेरे देवर का असामयिक निधन हो गया और शहडोल में कर्फ्यू लगा हुआ था किस तरह उनका अंतिम संस्कार और समस्त क्रिया कर्म हुआ यह सोच कर आज भी दिल बैठ जाता है, एक तो अचानक इतनी बड़ी आफ़त घर में आई और हम सबके हाथ बंधे थे कि हम चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे थे ।


सचमुच आज कोरोनावायरस ने ज़िंदगी की हकीकत को बताया है कि वाकई में "जीवन क्षणभंगुर है" हम दौड़ते हैं, भागते हैं, हाय-हाय करते हैं, कई लोग पैसा कमाने के लिए क्या-क्या नहीं करते, पर आज इतना समझ में आया कि हक़ीक़त सिर्फ और सिर्फ मृत्यु है । आप लाख पैसा जोड़ लीजिए भौतिक संसाधनों को घर में भर लीजिए, पर जब इस तरह की विपत्ति में हम फँसते हैं तो कोई भी चीज हमारे काम नहीं आती, काम आते हैं तो सिर्फ अपने सत्कर्म और अपने पुण्य, कितनी घटनाएँ हमारे शहडोल में हुई कोरोना से कितनी मौतें हुईं,  पर दोस्त/यार की तो बात छोड़िए अपने सगे-संबंधी भी ऐसी दु:खद परिस्थिति में साथ देने नहीं पहुँच पाए । आज घर पर लगातार रहते हुए यही एहसास होता है कि हमारा परिवार ही हमारा सब कुछ है और हम जो भौतिकता के नशे में चूर हैं उसका भी कोई मायने नहीं है जीवन का सच सिर्फ और सिर्फ मृत्यु है ।


कोरोना की दूसरी लहर तो और ज्यादा घातक बन कर संपूर्ण विश्व में फैल चुकी है आज भारत देश में 2 करोड़ 10 लाख 77 हजार 410 लोग कोरोना से संक्रमित हैं जिनमें से एक्टिव केस 412262 और स्वस्थ हुए मरीजों की संख्या 17280844 है ।


न जाने कितने ही लोग इस कोरोनावायरस के चलते काल के गाल में समा गए, कई घरों के दीपक बुझ गए, कैसी- कैसी घटनाएँ सुनने को मिलती हैं जिनसे हर जन सामान्य का दिल दहल जाता है, कई घटनाएँ तो ऐसी हुईं जिससे सनातन धर्म की मान्यताएँ ही बदल गईं, घर में कोई पुत्र न होने की वजह से पिता का अंतिम संस्कार पुत्री ने किया, क्योंकि कोई और रिश्तेदार मौके पर पहुँच ही न पाया, आज हम फिर लॉकडाउन की मार को झेल रहे हैं, सरकार के पास भी अब कोई चारा नहीं बचा । भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है, कई यूरोपीय देशों की जनसंख्या को मिला दिया जाए तो उतनी जनसंख्या भारत देश की होती है, इतने लोगों के बीच में कोरोनावायरस के संक्रमण को सिर्फ और सिर्फ हम और आप ही तोड़ सकते हैं ।


हमको और आपको आज अपने को बचा कर रखने की आवश्यकता है कुछ ही दिन की परेशानी है, अगर हम संयम में रहेंगे तो जिंदा रह पाएँगे और जब जिंदा रहेंगे तभी कुछ कर पाएँगे, इसलिए आप सभी से निवेदन है कि घर पर रहें और सुरक्षित रहें क्योंकि अगर हम वायरस की चपेट में आ गए, तो न कोई अपना साथ देगा, न ही हमारी कमाई हुई दौलत हमको बचा पाएगी, इसलिए इस संकट के काल में धैर्य पूर्वक हम सबको शासन के निर्देशों को मानते हुए सर्वप्रथम अपने आप को एवं अपने परिवार को सुरक्षित रखना है ।


डॉ.प्रियंका त्रिपाठी

लेखिका, संपादक एवं प्रकाशक 

शहडोल मध्यप्रदेश

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