बरसात में स्कूली बच्चों को नदी के उस पार स्कूल आने जाने में होती है मुश्किल
यदि बाढ़ आ गई तो स्कूल सेनहीं लौट पाते बच्चे
शहडोल l उमरिया जिले में कथली नदी के ऊपर रपटा पुलिया का निर्माण वर्ष 2007 मे भू संरक्षण विभाग के माध्यम से किया गया था l क्षेत्रीय विधायक ने भूमि पूजन किया था और निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात 2 साल में बाढ़ के पानी में आधी पुलिया टूट कर बह गई जिससे लगभग एक दर्जन गांव के लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया है पढ़ने वाले स्कूल के बच्चों को हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूल नदी पार करके जाना पड़ता है बरसात के मौसम में यदि नदी में बाढ़ आ गई तो नदी पार करने के लिए बाढ़ उतरने का इंतजार करना पड़ता है कई बार बच्चे स्कूल से वापस घर नहीं आ पाते लगभग 11 वर्ष बीत गए ग्राम वासियों को परेशानी झेलते परंतु क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि एवं जिला प्रशासन टूटी हुई पुलिया का पुनर्निर्माण नहीं करा रहा हैl
उम्मीदों पर पानी फिर गया
12मीटर चौड़ाई ओर 100 मीटर लंबा पुल एक वारिस नहीं झेल पाया ओर 2010 में बाढ़ में बह गया और जनता मूलभूत सुविधा से से वंचित हो गए लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया lलोगों को लगा था कि पुलिया का काम चालू होगा किंतु आज 11 साल बाद भी तात्कालिक मंत्री ने लोगों के आवेदन पर कोई सुनवाई नहीं की l
400 बच्चे नदी पार जाते हैं स्कूल
निर्माण कार्य कराया जाएगा इस बात को लेकर सरस वाही से लेकर बाहर तक पढ़ने वाले एक दर्जन गांव के लोग 11 साल से इंतजार कर रहे हैं उनकी मांग है की पुलिया का निर्माण अति शीघ्र कराया जाए lगांव के लोगों ने बताया कि स्कूल जो हाई स्कूल है लगभग 400 बच्चे अध्ययन के लिए यहां आते हैं जब बाढ़ आ जाती है तो बच्चे उसी पर रहे आते हैं अभिभावक और उनके परिजन बच्चों को लेकर अपने घर की राह देखते रहते हैंl
कोई जांच नहीं हुई
आश्चर्य इस बात का है कि टूटी पुलिया के मामले में आज तक न तो कोई जांच हुई और ना ही पुलिया के पुनर्निर्माण के संबंध में विधायक ने कोई रुचि दिखाई जिला प्रशासन भी निष्क्रिय बना हुआ है l इस बहे पुल की जांच की बात को लेकर कलेक्टर से कमिश्नर तक शिकायत की गई और समीपवर्ती गांव के सभी लोगों ने कतली नदी के बने हुए इस पुल पर पुनः निर्माण कार्य कराने की मांग की हैl इस संदर्भ में राम गोपाल एवं राघवेंद्र द्विवेदी ने बताया है कि 5000 की आबादी वाले क्षेत्र के मार्ग पर जंगल है जहां जानवर भी घूमते रहते हैं जिससे ग्राम वासियों एवं स्कूल के बच्चों को बच्चों को खतरा बना रहता हैl




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