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यम नहीं है कम

 *आवारा कलम से*  


दिनेश अग्रवाल वरिष्ठ पत्रकार 

शहडोल  l यमलोक में बड़ी अफरातफरी मची थी । यमराज पर आरोप लग रहे थे कि अचानक इतनी ज्यादा मात्रा में आत्माओं का परिवहन कैसे कर लिया गया जबकि एक ही भैंसा था ?

 यमराज बतला रहे थे आपात स्थिति में कई भैंसे टेंडर पर ले लिए गए जिनका भुगतान बाद में किया जाएगा ।

यह सवाल भी उठने लगे कि परिवहन सबसे ज्यादा भारत से क्यों हो रहा है ?

 यमराज ने बतलाया  यह एक प्राइवेसी के तहत हो रहा है जितनी आत्माएं यहां आ रही है उनका खुलासा संबंधित देश में नहीं हो रहा है । इसलिए इस गोपनीयता को मैं भंग नहीं कर सकता ।

सभासद कह रहे थे कि अचानक लाखों आत्माएं आ जाने से इनकी छटनी कौन करेगा?

 स्वर्ग में कितनी जानी नरक में कितनी जानी है गोलोक में कितनी जानी है और पेंडिंग कितनी रखनी है ?

यमराज ने बताया की आर्यावर्त से गंगा नदी में प्रवाहित होकर आई सारी आत्माओं को गोलोक में भेज दो और जिन्हें विधिवत अंतिम संस्कार नहीं मिल पाया उन सभी को भारत वापस भेज दो क्योंकि वहां पुनर्जन्म की आस्था  शेष बची हुई है । शेष आत्माओं को पेंडिंग में डाल दो । जब तक कोविड-19 है तब तक डिसीजन लेना जल्दबाजी कहलाएगी सभासदों ने पूछा यह कोविड-19 क्या है कोई नई नियुक्ति हुई है ? यमराज ने बतलाया कि मेरा जुड़वा भाई है ।

मां ने कभी बताया था कि यह मेले में खो गया था ।  इसका पालन पोषण चाची चाचा के यहां हुआ था । जब मैं भ्रमण पर चाइना गया, तब यह वहां मुझे खेलते हुए मिला । इसके दो बच्चे भी आने वाले हैं ,  जिनका नामकरण इसने ब्लैक एंड व्हाइट फंगस रखा है इस परिवार के आ जाने से मुझे काफी मदद मिल रही है क्योंकि यह सभी मेरी तरह अदृश्य तो होते ही हैं काम पूरा परफेक्ट करते हैं ।  सभासदों ने कहा कि जहरीली शराब पीने से जो आत्माएं आ रही थी, उन की आवक क्यों घट गई ?

तब यमराज ने बतलाया कि लोग शराब पीने की वजाए उससे  हाथ धोने लगे हैं । इसके लिए कुछ इंतजार करना पड़ेगा ।  जब पीने लगेंगे तब आने लगेंगे ।

यमराज ने अचानक अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए कहा ---         सुनो सभासदो !

   डिस्टेंसिंग बना के रखना । यह हमारा चचेरा परिवार जो है ना, वह कब इस तरफ मुंह फेर ले, कहा नहीं जा सकता । जब्ती की जो शराब रखी है ,  उस से हाथ धोना शुरू कर दो और आपस में दूरी बना लो। मैं भी रोज रोज तुम को बुलाकर नहीं समझाऊंगा, अब वर्चुअल मीटिंग करूंगा । मैं जब  बोलूंगा, उसे वैचारिक मंथन     समझना । बीच में बोलने वाले को वर्णाश्रम नहीं किया जायेगा । दुनिया कहां से कहां जा रही है और तुम सब पुरानी रीति नीति में ढले हो , अपने आप को बदलो और आत्मनिर्भर बनो । मेरे भरोसे मत रहना ।  सभी सभासद एक दूसरे का मुंह देखने लगे और मीटिंग हॉल से बाहर निकलने लगे उनकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि यम अचानक क्यों तमतमा गए ?

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